इतने घोटालों में मनमोहन बेदाग रहे, रेनकोट पहनकर नहाना वे ही जानते हैं :मोदी

नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा में हिस्सा लिया। मोदी ने इस दौरान कांग्रेस के घोटालों पर तंज कसा। कहा- ”इतने घोटालों में भी मनमोहन बेदाग रहे, रेनकोट पहनकर नहाने की कला वे ही जानते हैं।” मोदी की इस टिप्पणी के बाद राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस ने वॉकआउट कर दिया। इसके बाद मोदी ने रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी. सुब्बाराव की किताब ‘Who Moved My Interest Rate’ का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व फाइनेंस मिनिस्टर पी. चिदंबरम ने RBI के काम में दखल दिया था। उधर, मनमोहन पर मोदी के कमेंट से नाराज कांग्रेस अब बाकी बचे बजट सेशन में पीएम का बायकॉट करेगी। पीएम के स्पीच की बड़ी बातें…
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1. मनमोहन के लिए कहा- बाथरूम में रेनकोट पहनकर नहाना, ये कला सिर्फ डॉक्टर साहब जानते हैं
– मोदी ने कहा, ”पिछले सत्र में मनमोहन सिंहजी ने अपने विचार रखे थे। ये बात सही है कि अभी आप लोगों ने (कांग्रेस ने) एक किताब निकाली है। उसका फोरवर्ड (प्रस्तावना) डॉक्टर साहब ने लिखा है। हमें लगा किताब उन्हीं की है। लेकिन किताब किसी ने लिखी और फोरवर्ड उनका था। उनके भाषण में भी मुझे ऐसा लगा कि शायद…।”
– विपक्ष ने इस पर हंगामा किया। इस पर मोदी ने कहा- “जो मैंने बोला नहीं, उसका अर्थ आप कैसे समझ गए?”
– मोदी ने आगे कहा, ”35 साल तक इस देश में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा, जिसने आजादी के बाद आधा समय तक देश की अर्थव्यवस्था को देखा हो। लेकिन कितने घोटाले की बातें आईं। खासकर राजनेताओं के पास डॉक्टर साहब से बहुत कुछ सीखने जैसा है। इतना सब हुआ, उन पर एक दाग नहीं लगा। बाथरूम में रेनकोट पहनकर नहाना, ये कला सिर्फ डॉक्टर साहब (मनमोहन सिंह) जानते हैं।”
2. पैरेलल इकोनॉमी का सबसे ज्यादा नुकसान गरीब को
मोदी ने कहा, ”ज्यादातर चर्चा नोटबंदी के आसपास रही है। इस बात से हम इनकार नहीं कर सकते कि हमारे देश में एक बुराई आई है। इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि इसने हमारी अर्थव्यवस्था में, समाज में जड़ें जमा दी हैं। और इसलिए भ्रष्टाचार-कालेधन के खिलाफ लड़ाई राजनीतिक निर्णय नहीं है।”
– ”पैरेलल इकोनॉमी के कारण सबसे ज्यादा नुकसान गरीब का हुआ। गरीब का हक छीना जाता है और उसका शोषण होता है। प्रयास पहले भी हुए होंगे। हम कब तक इन समस्याओं को कारपेट के नीचे डालकर गुजारा करते रहेंगे।”
3. इसलिए मिले आतंकियों से जाली नोट
– पीएम ने कहा, ”जाली नोट की बात होती है। जो आंकड़े प्रचारित हैं, वो आंकड़े जाली नोटों के बैंकों के पहुंचने तक है। ज्यादातर जाली नोट बैंक के दरवाजे तक न जाएं, इस व्यवस्था से चलाए जाते हैं। आतंकवाद-नक्सलवाद को बढ़ावा देने में इसका उपयोग होता है।”
– “कुछ लोग उछल-उछलकर कह रहे हैं कि आतंकियों के पास दो हजार रुपए के नए नोट मिले। हमें पता होना चाहिए कि बैंक लूटने का प्रयास और नए नोट ले जाने का प्रयास जम्मू-कश्मीर में हुआ। जाली नोट बंद होने के बाद उनके सामने दिक्कत आई। नोटबंदी के कुछ ही दिन बाद जो आतंकी मारे गए, उनके पास से ये नोट मिले।” मोदी का ये तंज राहुल गांधी पर था। राहुल ने कश्मीर में मारे गए आतंकियों के पास से 2 हजार के नोट मिलने का मुद्दा उठाया था।
3. जब किताब में वांचू कमेटी का जिक्र हुआ तो आप सो रहे थे क्या?
– मोदी ने कहा, ”इन कदमों से ईमानदारों को बल मिलेगा, ऐसा हमारा स्पष्ट मत है। बहुत पहले वांचू कमेटी बनी थी। नोटबंदी की आर्थिक जरूरतों के संबंध में उन्होंने इंदिराजी के समय अपनी रिपोर्ट दी थी। यशवंतराव चह्वाण उससे सहमत थे। लेकिन इंदिराजी ने कहा था कि हम राजनीति में हैं और चुनाव लड़ने होते हैं।”
– इस पर कांग्रेस मेंबर्स ने हंगामा किया। तब मोदी ने कहा, “ये गोडबोलेजी की किताब में है। अच्छा होता किताब जब छपी, तब आपने पढ़ी होती। आप सो रहे थे क्या? कहां थे आप? आपकी जगह मैं होता तो गोडबोलेजी के खिलाफ केस कर देता। लेकिन आपने नहीं किया। आज जब उनकी किताब की चर्चा हो रही है, तो आपको परेशानी हो रही है।”
4. 700 माओवादियों ने सरेंडर किया
– मोदी ने कहा, ”आज जाली नोट, हवाला कारोबार, आतंकवाद, ड्रग्स का कारोबार फैल चुका है। पहले ऐसा नहीं था। हमने जब फैसला किया तो जाली नोट तो उसी वक्त न्यूट्रिलाइज हो गए थे। आपने टीवी पर देखा होगा। दूसरे देश में जाली नोट का कारोबार करने वाले को आत्महत्या करनी पड़ी थी।”
– ”हमारे देश में नवंबर-दिसंबर के दरमियान 40 दिन में 700 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। ये नोटबंदी के बाद हुआ। अगर माओवादी सरेंडर करें और उसका संतोष में किसी को ना हो तो ऐसा हो नहीं सकता। और अगर संतोष नहीं हो रहा है तो मामला कुछ और है।”
5. चाय बागानों में काम करने वालों को पूरा वेतन मिल रहा है
– पीएम ने कहा, ”हजार के नोट छपने के बाद 500 के नोट कम मिल रहे थे। अब ऐसा नहीं है। पहली बार ऐसा हुआ कि ऐसे फैसले के बाद सभी बैंकों ने एक साथ ब्याज दर कम किया। यहां असंगठित कामगारों की बात हुई। कामगारों को सुरक्षा मिलनी चाहिए। समय रहते हम उन्हें ईपीएफ और ईएसआईसी स्कीम से जोड़ेंगे। असम का उदाहरण देना चाहूंगा। चाय बागान में काम करने वालों के लिए उन्होंने 7 लाख बैंक खाते खुलवाए। मोबाइल ऐप पर उन्हें कारोबार करना सिखाया। इससे चाय बागान के मजदूरों को पूरा वेतन मिलने लगा। वहां बहुत अच्छा एक्सपीरियंस मिला।”
6. ज्योतिर्मय बसु ने कहा था- इंदिरा की सरकार कालेधन पर टिकी है
– मोदी ने कहा, ”हमारी और सीतारामजी (येचुरी) की विचारधारा अलग है। लेकिन ये एक ऐसा विषय था कि हमें लगा था कि सीतारामजी का दल हमारे साथ होगा। इसका एक कारण था। कारण यह था कि आपकी ही पार्टी के सीनियर नेता ज्योतिर्मय बसु ने 1972 में वांचू कमेटी की रिपोर्ट सदन में रखने की मांग की थी और लड़ाई लड़ी थी। सरकार प्रस्तुत नहीं कर रही थी। वे खुद उस रिपोर्ट की कॉपी ले आए। उसे टेबल पर रखा। उनका उस दिन का भाषण आज भी याद रखने लायक है।”
– ”बसु ने कहा था कि 12 नवंबर 1970 को इस शक्तिशाली और प्राथमिक सिफारिशों में से एक था विमुद्रीकरण। श्रीमती इंदिरा गांधी कालेधन के दम पर ही बची हुई है। उनकी राजनीति कालेधन पर ही टिकी है। इसलिए इस रिपोर्ट को लागू नहीं किया गया और दबाए रखा गया। दोबारा 4 सितंबर 1972 को लोकसभा में बसु ने कहा था कि मैंने विमुद्रीकरण और अन्य उपायों की सिफारिश की है। मैं अब उन्हें दोहराना नहीं चाहता। सरकार को ईमानदारी के साथ लोगों का सहयोग करना चाहिए, लेकिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार का चरित्र कालेधन का है। उनकी सरकार कालेधन द्वारा है और कालेधन के लिए है।”
– ”हरकिशन सिंह सुरजीत ने भी कहा था कि क्या बड़े नोट बंद करने के फैसले लिए जा सकते हैं। ये सवाल उन्होंने 1981 में उठाया था।”
– ”लिहाजा, लेफ्ट से आग्रह है कि इस लड़ाई में हमारा साथ दीजिए।” इस पर लेफ्ट के सीताराम येचुरी ने कहा कि हमारा विरोध तरीके से है, विचार से नहीं।
7. भीम ऐप पर कोई खर्च नहीं
– मोदी ने कहा, ”किसी भी बच्चे को पूछो कि स्कूल नहीं जाते हो। वो कहेंगे कि रोज जाता हूं। ये उसे भी मालूम है और मुझे भी मालूम है कि वो संडे को नहीं जाता। इसी तरह कैशलेस का मतलब है कि धीरे-धीरे समाज को उस दिशा में ले जाना। दुनियाभर में आज भी बैलेट पेपर पर चुनाव होता है। यही वो देश है कि यहां बटन दबाकर वोट डाला जाता है। असुविधा है, तकलीफ है, इसलिए छोड़ देना ठीक नहीं होगा।”
– ”भीम ऐप में एक नए पैसे का खर्च नहीं। एक रुपए का कमीशन किसी बैंक को नहीं जाता। जब दुनिया इस तरफ बढ़ रही है तो भारत को पीछे रहने का कोई कारण नहीं है।”
– ”जनधन अकाउंट के साथ 21 करोड़ रुपे कार्ड दिए गए हैं। जेब में एक कार्ड होना एक वर्ग के लिए प्रेस्टिजियस विषय बन गया है। हमने समाज के लोगों की छोटी-छोटी उम्मीदों को पूरा किया है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए हमने हर साल 50 हजार करोड़ रुपए का लीकेज बचाया है। बिचौलियों की भूमिका खत्म कर दी है।”
– ”इस सरकार ने डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल बनाया। बैंकिंग में प्रोफेशनलिज्म लेकर आए। उसमें भर्ती के लिए बोर्ड बनाया।”
8. आरबीआई गवर्नर का बचाव
– मोदी ने कहा, ”मुझ पर हमला होना स्वाभाविक है। लेकिन रिजर्व बैंक को घसीटने और उनके गवर्नर को घसीटने का कोई कारण नहीं है। इनसे पहले भी जो गवर्नर थे, उस वक्त भी आवाजें उठी थीं। मैंने उसका भी विरोध किया था। आरबीआई की बड़ी भूमिका है अर्थव्यवस्था में। जो आरबीआई पर सवाल उठाते हैं और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, मैं उनसे एक बात कहना चाहता हूं।”
– ”आरबीआई के गवर्नर सुब्बाराव ने एक किताब लिखी है। इस किताब में उन्होंने लिखा है कि 2008 में तत्कालीन वित्त सचिव के तहत लिक्विडिटी मैनेजमेंट कमेटी नियुक्त करने से मैं परेशान था। चिदंबरम ने भारतीय बैंक के विषय में ओवरस्टेप किया था। लिक्विडिटी मैनेजमेंट पूरी तरह से आरबीआई का विषय है। उन्होंने न सिर्फ ओवरस्टेप किया, बल्कि मुझे बताया ही नहीं। मुझे नहीं पता था कि यह मेरे और उनके बीच मेरे आखिरी दिनों में संबंध असहज करने की टोन सेट करेगा।”
– मोदी ने रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी. सुब्बाराव की बुक ‘Who Moved My Interest Rate’ को कोट करते हुए कहा कि पूर्व फाइनेंस मिनिस्टर पी. चिदंबरम ने आरबीआई के काम में दखल दिया था।
वेल में कांग्रेस मेंबर्स का हंगामा
– मोदी के मनमोहन पर दिए बयान पर राज्यसभा में हंगामा हुआ। कांग्रेस के मेंबर्स वेल तक आ गए।
– सभापति डॉ. हामिद अंसारी को कहना पड़ा कि अपनी जगह पर लौट जाएं।
– केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि मोदी को हिटलर, मुसोलिनी कहा गया। तब ये विपक्ष कहां था।
– रविशंकर प्रसाद ने भी कहा कि क्या आपने हमारे प्रधानमंत्री के बारे में बुरी-बुरी बातें नहीं कहीं?
– इसके बाद कांग्रेस ने वॉकआउट कर दिया।
– मोदी ने आगे कहा- ”इतने बड़े पद पर रहे व्यक्ति ने जब बंदर और लूट जैसे शब्द प्रयोग किए थे तो ये सोचना चाहिए था कि संविधान की मर्यादा क्या होती है। हम मर्यादा का आदर करते हैं। किसी भी रूप में पराजय स्वीकार ही नहीं करना, ये कब तक चलेगा?”
News Source – Danik Bhaskar

NEWS SOURCE-- DAINIK BHASKAR