गोबर से मिला बिजनेस आइडिया, अब हर महीने 4 लाख कमाता है यह शख्स

आइडिया ज्यादातर लोगों के पास होते हैं, लेकिन उसे बिजनेस में बदलने की हिम्मत कम ही लोग करते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो अपने यूनीक आइडिया के दम पर अच्छा खासा बिजनेस खड़ा कर लेते हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं गुरशरण सिंह, जिन्होंने लीक से हटकर बिजनेस शुरू किया और आज वो हर महीने 4 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं। आइए जानते हैं उन्होंने क्या बिजनेस शुरू किया और कैसे सफलता हासिल की…

पंजाब के रहने वाले गुरशरण सिंह ने बताया कि एग्रीकल्चर में मार्केटिंग मैनेजमेंट करने के बाद वो एक फर्म में नौकरी करने लगे। शुरू से अपना कुछ बिजनेस करने की योजना थी। लेकिन कोई आइडिया नहीं मिल रहा था। इस दौरान उन्होंने गौर किया सरकार किसानों को जैविक फर्टिलाइजर का इस्तेमाल बढ़ाने और फर्टिलाइजर के अधिक उपयोग से खेतों को बंजर होने से बचाने का प्रयास कर रही है। फर्टिलाइजर में नाइट्रोजन की मात्रा ज्यादा होती है। वहीं गोबर में भी नाइट्रोजन पाया जाता है। यहीं से उनको बिजनेस आइडिया मिला और शुभकरमन वर्मीकम्पोस्ट की शुरुआत हुई। आज उनकी कंपनी का टर्नओवर 50 लाख रुपए सालाना है।

 

सरकारी संस्था से मिली मदद

गुरशरण कहते हैं कि वर्मीकम्पोस्ट बनाने का आइडिया मिलने के बाद इसकी शुरुआत कैसे की जाए, इस बारे में थोड़ी परेशानी थी। परेशानी दूर करने के लिए मैंने सरकारी संस्था नाबार्ड से मदद ली। इस संस्था से प्रशिक्षण मिलने के बाद मैंने वर्मीकम्पोस्ट बनाने की यूनिट लगाई।

लोन लेकर की शुरुआत

वर्मीकम्पोस्ट की यूनिट लगाने के उनके पास पैसे नहीं थे। शुरुआत में तो उन्होंने 1.75 लाख रुपए का लोन लिया। लेकिन इस पर उन्हें कोई सब्सिडी नहीं मिली। इस दौरान उनको पता चला कि सरकार ऐसी यूनिट शुरू करने वाले को सब्सिडी भी देती है। तो उन्होंने एक बैंक से 5 लाख रुपए का लोन लिया जिसमें से उन्हें 36 फीसदी सब्सिडी मिली। एक जानकार ने उनको एग्रीकल्चर टेक्नोनलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी (एटीएमए) एजेंसी के बारे में बताया, जहां खेती में उपयोग होने वाली नई-नई टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी मिली।

सालाना 3000 क्विंटल वर्मीकम्पोस्ट करते हैं तैयार

गुरशरण का कहना है कि वो सालाना 2500 से 3000 क्विंटल वर्मीकम्पोस्ट की सप्लाई करते हैं। वो 500 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाल से वर्मीकम्पोस्ट बाजार में बेचते हैं। उनका कहना है कि वो सालाना करीब 50 लाख रुपए की कमाई कर लेते हैं। फिलहाल उनका वर्मीकम्पोस्ट का बिजनेस पंजाब तक ही सीमित है। लेकिन वो हिमाचल प्रदेश और श्रीनगर में बिजनेस बढ़ाने की बात कर रहे हैं।

गोबर से बनाता है वर्मीकम्पोस्ट

वर्मीकम्पोस्ट को बनाने में गोबर का इस्तेमाल ज्यादा होता है। इसके अलावा सड़े-गले पत्ते, स्ट्रा आदि को गोबर में मिक्स करने के बाद उसमें केंचुआ डाला जाता है। केंचुए के अपशिष्ट वर्मीकम्पोस्ट कहलाता है। उनके पास ज्यादा जानवर नहीं होने की वजह से वो आस-पास के इलाके से गोबर खरीदते हैं। वो कहते हैं 35 क्विटंल गोबर की एक ट्रॉली खरीदने पर करीब 1500 रुपए का खर्च आता है। गोबर में 40 से 50 फीसदी वाटर कंटेट होता है। इसमें से 17-18 किलो गोबर मिलता है। एक ट्रॉली को बनाने में 1200 से 1500 रुपए का खर्च होता है और कम्पोस्ट 70 से 90 दिनों में तैयार हो जाता है।

NEWS SOURCE-- DAINIK BHASKAR