ये 5 आदतें जिनसे अनजाने में ही आप खुद को पहुंचाते हैं नुकसान, जानिए कैसे निपटें इनसे

खुद को नुकसान पहुंचाने की आदत सिर्फ शारीरिक रुप से नहीं होती, कई बार हम मानसिक रुप से भी अपने आप को अनजाने में ही नुकसान पहुंचाते हैं। कुछ आदतें ऐसी होती हैं जो आपको भीतर से नुकसान पहुंचाती हैं, हमें पता भी नहीं चलता कि कब हम अपने आप को ही इमोशनली हर्ट करने की स्थिति में पहुंच गए हैं। ये स्थिति आज के टीनएजर्स में ज्यादा है। स्कूल और कॉलेज के बच्चों में सुसाइडल टेंडेंसी बढ़ती जा रही है, इसको लेकर पैरेंट्स भी परेशान हो रहे हैं। बच्चों में आत्महत्या के मामले तो हैं ही, लेकिन इससे भी ज्यादा परेशानी का कारण वो आदतें हैं, जो टीनएजर्स और युवाओं में बढ़ती जा रही है, जिनसे वो खुद को भावनात्मक रुप से चोट पहुंचा रहे हैं।

आइए क्या हैं वो आदतें जिनसे अनजाने में ही हमें अपने आप को चोट पहुंचा रहे हैं और कैसे पैरेंट्स अपने बच्चों की इन आदतों छुड़ा सकते हैं।

जरुरत से ज्यादा विनम्र होना

आजकल बच्चों को जो परवरिश दी जा रही है उनमें उनको बहुत ज्यादा विनम्र होने पर दबाव दिया जा रहा है। पैरेंट्स को ये समझना होगा कि बच्चों को इतना विनम्र भी ना बनाएं कि वे अपने खिलाफ हो रहे किसी काम का विरोध भी ना कर सकें। अगर टीनएज में हम किसी बात का विरोध करना नहीं सिखते हैं तो धीरे-धीरे ये चीज कुंठा में बदल जाती है, जो डिप्रेशन की शुरुआत है। इसलिए, विनम्रता और अत्यधिक विनम्रता के बीच अंतर करना सीखें। विनम्र होने का ये अर्थ नहीं है कि आप अपने खिलाफ हो रहे किसी काम का विरोध ही ना करें।

अपनी भावनाओं को दबाना या छिपाना

ये भी आज के टीनएजर्स की बड़ी समस्या है। कई बच्चों की आदत होती है कि वो अपनी भावनाओं को जाहिर ही नहीं कर पाते। ये आदत कई बड़ी उम्र वालों में भी होती है। उन्हें क्या पसंद है, क्या नहीं ये वो जता नहीं पाते। ये आदत उन्हें तब नुकसान पहुंचाती है जब वो अपनी पसंद की चीजों से दूर होते जाते हैं और दूसरों की थोपी बातों को फॉलो करते हैं। ये आदत उन्हें अंदर से परेशान करती है। अकेले में ऐसे लोग अक्सर उन्हीं सब बातों के बारे में सोचते हैं जो वो करना चाहते थे लेकिन कर नहीं पाए। ये चीज उन्हें डिप्रेशन की ओर ले जाने लगती है। बच्चों को कम से कम इतनी आजादी जरूर दें कि वो अपनी भावनाओं को ठीक से व्यक्त कर पाएं, अपनी पसंद-नापसंद को जता पाएं।

सोर्स – teentalkindia.com

जरुरत से ज्यादा सोना

पर्याप्त नींद सेहत के लिए जरूरी है लेकिन जरूरत से ज्यादा सोना शरीर और दिमाग दोनों के लिए खतरनाक है। ज्यादा सोने की आदत आलस तो लाती ही है, साथ ही दिमाग को भी सुस्त बनाती है। छुट्टी के दिन ज्यादा सोना या सुबह देर तक सोने से दिमाग के निर्णय लेने की क्षमता पर असर होता है। मेडिकल भाषा में नौ घंटे से ज्यादा सोने को हाइपरसोमिया कहते हैं, जो एक तरह का डिसआर्डर है। इससे निपटने के लिए रोज अपने जरूरी कामों की लिस्ट बनाएं, उनकी डेडलाइन तय करें और प्रायोरिटी में वो काम रखें जो सुबह जल्दी करने हैं। अलार्म का उपयोग कर अपने टाइम को मैनेज करने की आदत डालें।

खाने की आदत

देर रात खाना लेना आजकल एक आदत हो गया है। ये शरीर को खराब करता है। युवाओं में खाने को लेकर एक अलग ही आदत पनप रही है। शरीर और दिमाग की चुस्ती के लिए बैलेंस डाइट जरूरी है। खाने को एक काम की तरह लिया जा रहा है। ये आदत धीरे-धीरे शरीर को कमजोर करती है क्योंकि देर रात में खाया गया खाना ना ठीक से पचता है और ना ही एनर्जी देता है। इस आदत को बदलने के लिए भोजन का आनंद लेने की आदत डालें। एक-एक कोर को ऐसे खाएं जैसे कोई चॉकलेट मुंह में घुलती है और आप उसके स्वाद का आनंद लेते हैं। ये आदत आपको जल्दी खाना खाने की ओर ले जाएगी।

अनचाही देरी करना

युवाओं में काम को होल्ड पर रखने की आदत भी तेजी से बढ़ रही है। जरूरी कामों को भी टाल देना, बाद में उस काम के लिए परेशान होना, मानसिक दबाव का कारण बनता है। आदत डालें कि अपने जरूरी कामों की एक लिस्ट प्रायोरिटी बेसिस पर तैयार करें, उन कामों की डेड लाइन तयकर उन्हें निपटाने की आदत डालें। इससे आप अनचाहे तनाव से बच सकते हैं।

 

 

NEWS SOURCE-- DAINIK BHASKAR