इस दिवाली नहीं खरीद पाएंगे ये 4 तरह के पटाखे, चेक करें लिस्ट

इस साल दिवाली पर आप दिल खोलकर पटाखे खरीद भी सकते हैं और उन्हें चला भी सकते हैं। शर्त बस इतनी सी है कि पटाखे इको-फ्रेंडली यानी ग्रीन नॉर्म्स के तहत आते हों। पिछले साल दिवाली से पहले सुप्रीम कोर्ट ने पटाखे खरीदने पर बैन लगा दिया था। इस फैसले को बदलते हुए कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि बैन सिर्फ ऐसे पटाखों पर जारी रहेगा जो ग्रीन नॉर्म्स का पालन नहीं करते हैं। इसके तहत इस साल आप इन 4 तरह के पटाखों को नहीं चला पाएंगे। साथ ही इस साल सिर्फ दो घंटे ही पटाखे चलाए जा सकते हैं।

1. नहीं मिलेगी लड़ी

दिवाली पर लड़ी ज्यादातर लोगों की फेवरेट होती है, जिसमें एक लड़ी में हजार-हजार बम तक होते हैं। ऐसे में एक बार शुरू होते ही यह कई मिनटों तक बजती रहती है। यह तेज आवाज भी करती है और जहरीला धुआं भी छोड़ती है। ऐसे में इस दिवाली आप लड़ी भी नहीं चला पाएंगे, क्योंकि यह ग्रीन नॉर्म्स में नहीं आती।

2. अधिक आवाज वाले पटाखे

पटाखों की आवाज ध्वनि प्रदूषण का बहुत बड़ा कारण है। यह स्वास्थ्य के लिए भी बेहदहानिकारक होती है। दिवाली में चलाया जाने वाला एक सामान्य से बम की आवाज का स्तर भी 100 डेसिबल होता है। कई पटाखों में आवाज का स्तर 125 डेसिबल को भी पार कर जाता है, जबिक इंसान के लिए 50 डेसिबल से ऊंची आवाज खतरनाक हो सकती है। ऐसे पटाखों के चलते इंसान के बहरा होने की संभावना रहती है अौर हृदय रोगियों में दिल का दौरा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड्स द्वारा इसकी सीमा अभी तय करनी है।

3.प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे

पटाखों में कॉपर, कैडियम, लेड, मैग्नेशियम, सोडियम, जिंक, नाइट्रेट और नाइट्राइट जैसे रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। इनका मिश्रण पटाखों को घातक बना देता है। जब ये पटाखे चलते हैं तो ये केमिकल्स हवा में घुल जाते हैं और हवा प्रदूषित हो जाती है जिससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ होती है। यही कारण है कि दिवाली पर लोगों को दमा, अस्थमा, टीबी और फेफड़ों से संबंधित बीमारियां हो जाती हैं। इस दिवाली आप ऐसे पटाखे नहीं खरीद पाएंगे जो इन खतरनाक केमिकल्स से बने हों।

4. चीनी पटाखे

दिवाली पर चीनी लाइटिंग और पटाखों की बिक्री खूब बढ़ जाती है। ये पटाखे ज्यादा रोशनी और और आवाज करने के साथ सस्ते भी हाेते हैं, इसलिए लोग इन्हें खरीदना पसंद करते हैं। लेकिन ये पटाखे प्रदूषण बहुत फैलाते हैं और इनसे हादसे होने का भी खतरा रहता है।

बच्चों को रखें इस पटाखे से दूर : 

चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन और पुणे यूनिवर्सिटी ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि सांप पटाखा यानी स्नेक टैबलेट बच्चों के लिए सबसे हानिकारक पटाखा है। काली काली टिकियां जिन्हें जलाने से सांप जैसी आकृति बनती है, उसे जलाने से सबसे ज्यादा खतरनाक तत्व निकलते हैं। चकरी, फुलझड़ी, अनार, लड़ी भी बच्चों के लिए कम नुकसानदायक नहीं है।

NEWS SOURCE-- DAINIK BHASKAR