सफेद जहर / पॉश्चराइज्ड मिल्क, नमक, रिफाइंड अनाज बढ़ाते हैं बीपी, डायबिटीज आैर मोटापे का खतरा

अनजाने में हम अपनी डाइट में धीमा जहर ले रहे हैं। ‘स्वास्थ्य के बजाय स्वाद’ और खुद पकाने के बजाय रेडी टू ईट, पैक्ड फूड पर निर्भर होते जा रहे हैं। आज तो छुट्टी है कुछ अच्छा खाना चाहिए? पर फोकस करने लगे हैं। इन सारे परिवर्तनों ने इन्हें सुखद के बजाए दुखद बना दिया है। अब न तो वो इम्युनिटी रह गई है और न ही वो जेनेटिक मजबूती जो हमें रोगों से लड़ने की शक्ति देती है। सफेद चावल, पेस्टराइज्ड गाय दूध, मैदा, प्रोसेस्ड नमक और चीनी 5 सफेद जहर हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं हैं। क्योंकि उनमें शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक 5 महत्वपूर्ण तत्व जिन्हें ‘प्रोक्सीमेट प्रिंसीपल ऑफ फूड’ कहा जाता है जैसे वसा, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन या खनिजों की सही मात्रा नहीं है। वे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, कब्ज, गैस बनना, अपच, अनिद्रा जैसी अन्य बीमारियां का खतरा भी बढ़ाते हैं। प्रो. डॉ. राजेंद्र सिंह, विभागाध्यक्ष, कम्युनिटी मेडिसिन, एलबीएसएच मेडिकल कॉलेज, इलाहाबाद से जानिए ये क्यों नुकसान पहुंचाते हैं।

  • पॉश्चराइज्ड मिल्क : इस दूध के बारे में एकमात्र अच्छी बात यह है कि इसमें लंबा जीवन है। पाश्चराइजेशन की प्रक्रिया लंबे समय तक दूध को अच्छा रखती है, लेकिन इसके पौष्टिक मूल्य को नुकसान पहुंचाती है। यह दूध से एंजाइम, विटामिन ए, बी 12 और सी हटा देता है। यह प्रक्रिया दूध के लिए हार्मोन और एंटीबायोटिक दवाओं को भी स्थानांतरित करती है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि प्रक्रिया लैक्टोबैसिलस एसिडोफिलस जैसे आवश्यक और अच्छे बैक्टीरिया को भी नष्ट कर देती है। इसके अलावा, लगभग 20% आयोडीन दूध से हटा दिया जाता है और इस प्रकार इसे लेने के बाद, कब्ज होने की आशंका बढ़ जाती है।

  • रिफाइंड चावल : ब्लड शुगर को बढ़ाता है : चावल को रिफाइंड करने की प्रक्रिया बाहरी परत और जर्म लेयर को हटाने से होती है। चावल केवल एंडोस्पर्म के साथ छोड़ दिया जाता है। इस परत में भारी मात्रा में स्टार्च होता है, जो रक्त शर्करा या ग्लूकोज के स्तर को काफी हद तक बढ़ा सकता है।

  • रिफाइंड चीनी : सफेद चीनी या रिफाइंड शक्क्र रसायनों से भरा होता है। इसमें कोई पोषक तत्व नहीं होते। रासायनिक चीनी गन्ना या चुकंदर से लिया गया है। फिर, फाइबर मुक्त चीनी पाने के लिए इस पदार्थ का रस निकाला जाता है। चीनी को सफेद दिखाने के लिए ब्लीचिंग की जाती है। इसके लिए कैल्शियम सल्फेट और सल्फ्यूरिक एसिड का भी उपयोग किया जाता है।

  • रिफाइंड नमक : सामान्य टेबल नमक में आयोडीन होता है। एक स्वस्थ शरीर के लिए यह आवश्यक है। लेकिन रिफाइनिंग प्रोसेस के दौरान नमक से आयोडीन हट जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान फ्लोराइड जोड़ा जाता है। अधिक मात्रा में खपत होने पर फ्लोराइड खराब होते हैं। रिफाइंड नमक की खपत भी रक्तचाप बढ़ जाती है। इसे सीमित प्रयोग करें।

  • रिफाइंड आटा या मैदा : रिफाइंड आटा  या मैदा छिलका हटाकर महीन पीसा और छाना आटा है जिससे नूडल्स, ब्रेड़, सेवई या स्टिक्स बनती है। सुप्रसिद्ध भारतीय ‘एवरी टाइम स्नेक्स’ समोसे, कचौड़ी, फुल्की, रोस्ट टोस्ट, बिस्किट सब मैदे से ही बनते हैं और गुलाब जामुन, बालूशाही, खुरमे आदि में मैदे का प्रचुर मात्रा में उपयोग करते हैं।

NEWS SOURCE-- DAINIK BHASKAR