4 नहीं, 24 घंटे में भी बच सकती है ब्रेन स्ट्रोक पीड़ित की जान

  • ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के लिए राहत की खबर
  • थ्रंबोक्टॉमी तकनीक से बच सकती है मरीज की जान

ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों के लिए एक राहत भरी खबर है। उनके बचने की संभावना बढ़ गई है। अब सिर्फ चार-साढ़े चार घंटे ही नहीं, बल्कि 16-24 घंटे के दौरान भी इलाज मिल जाए तो जान बचने की संभावना है। बशर्ते इलाज मिले।

 

यह दावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई एक स्टडी के जरिए किया जा रहा है। इस बात का खुलासा शनिवार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय न्यूरोलॉजिस्ट के लिए आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में किया गया। सम्मेलन में पांच देशों के करीब 250 डॉक्टरों ने हिस्सा लिया।

अमेरिका में हुआ रिसर्च, थ्रंबोक्टॉमी से इलाज संभव : 

सम्मेलन में आए डॉक्टरों के मुताबिक जनवरी, 2018 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए एक शोध के मुताबिक ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित मरीज की जान स्ट्रोक के 16-24 घंटे के दौरान तक बचाई जा सकती है। जनवरी 2018 में अमेरिका में दो नए क्लीनिकल ट्रायल के परिणाम सामने आए।

इन दोनों ट्रायल में 200-200 मरीजों पर अध्ययन किया गया है। दोनों अध्ययन बताते हैं कि 16-24 घंटे में यदि मरीज अस्पताल में पहुंचते हैं तो थ्रांबेक्टॉमी से इलाज किया जा सकता है। थ्रंबोक्टॉमी नाम की तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इसमें पैर के नस से एक कैथेटर को दिमाग के उस हिस्से में पहुंचाया जाता है जहां रक्त का थक्का जमा हुआ है। उसके बाद उसे कैथेटर के जरिए वहां से निकला लिया जाता है।

थ्रंबोक्टॉमी तकनीक से बच सकती है मरीज की जान : 

अपोलो अस्पताल के डॉ दिनेश एम चौधरी का कहना है कि अब तक ब्रेन स्ट्रोक के सफल इलाज के लिए शुरुआती साढ़े चार घंटे को ही अहम माना जाता है क्योंकि इस दौरान दिमाग की नसों में जमे रक्त के थक्के को इंजेक्शन के जरिए घोल कर निकाल लिया जाता है।

हालांकि, इसके बाद भी अगले 2 घंटे तक मरीज अस्पताल पहुंचे तो स्टेंट के जरिए थक्के को निकाल लिया जाता है, लेकिन थ्रंबोक्टॉमी तकनीक ने मरीज की जान बचने की संभावना को बढ़ा दिया है।

NEWS SOURCE-- DAINIK BHASKAR