गाय के गोबर से बनेंगे पेपर, 15 लाख में लगा सकते हैं प्लांट

गोबर शब्द का प्रयोग अक्सर बर्बादी के लिए किया जाता है। लेकिन अब गाय के गोबर अच्छी-खासी कमाई का जरिया बनने जा रहे है। सरकार ने गोबर से कागज (paper) बनाने का सफल प्रयोग कर लिया है। एमएसएमई मंत्रालय के तहत काम करने वाले खादी ग्रामोद्योग (केवीआईसी) की यूनिट केएनएचपीआई ने तो गाय के गोबर (cowdung) से कागज का उत्पादन भी शुरू कर दिया है। अब देश भर में इस प्रकार के प्लांट लगाने की योजना तैयार की जा रही है। कागज बनाने के लिए गोबर के साथ कागज के चिथड़े का इस्तेमाल किया जाता है।

गोबर से वेजिटेबल डाई बनाने का भी काम

केवीआईसी के चेयरमैन वी.के. सक्सेना ने मनी भास्कर को बताया कि गोबर से कागज बनाने के साथ वेजिटेबल डाई बनाने का भी काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गोबर में से कागज बनाने लायक सिर्फ 7 फीसदी मैटेरियल निकलते हैं। बाकी के 93 फीसदी का इस्तेमाल वेजिटेबल डाई बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा। ये वेजिटेबल डाई पर्यावरण के अनुकूल होते हैं। इसका निर्यात भी किया जा सकता है।

5 रुपये किलो बिकेंगे गोबर

सक्सेना ने मनी भास्कर को बताया कि यह स्कीम किसानों की आय को दोगुना करने के लिए लाई जा रही है। उन्होंने बताया कि कागज एवं विजिटेबल डाई बनाने के लिए सरकार 5 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से किसानों से गोबर खरीदेगी। एक जानवर एक दिन में 8-10 किलोग्राम गोबर करता है। ऐसे में, किसानों को अपनी मवेशियों से रोजाना कम से कम 50 रुपये तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।

कहां-कहां लगेंगे प्लांट  

सक्सेना ने बताया कि इस प्रकार के प्लांट देश भर में लगाने की योजना है। निजी लोगों को इस प्रकार के प्लांट लगाने के लिए सरकार की तरफ से कर्ज मुहैया कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि केवीआईसी ने इस टेक्नोलॉजी  का सफल परीक्षण कर लिया है और केवीआईसी लोगों को टेक्नोलॉजी देने का काम करेगा। उन्होंने बताया कि केवीआईसी के जयपुर स्थित केएनएचपीआई प्लांट में अगले 15-20 दिनों में गोबर से कागज बनाने का काम आरंभ हो जाएगा। 

15 लाख में लग जाएंगे ये प्लांट

गोबर से कागज बनाने वाले प्लांट लगाने में 15 लाख रुपये खर्च होंगे। एक प्लांट से एक माह में 1 लाख कागज के बैग बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा वेजिटेबल डाई अलग।

NEWS SOURCE-- DAINIK BHASKAR